Baba Ram Rahim

“गांव में स्वच्छता अभियान” शब्द मैंने पहली बार टीवी पर सुना था, जब देशभर में स्वच्छ भारत मिशन की चर्चा चल रही थी। तब मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन मैं खुद इस अभियान का हिस्सा बनूँगा!

एक दिन मैं शहर गया, वहाँ एक सफाई अभियान के दौरान कुछ स्वयंसेवकों को काम करते देखा। वे डेरा सच्चा सौदा और अन्य संस्थाओं के लोग थे। किसी ने उन्हें मजबूर नहीं किया था; वे खुद झाड़ू उठा रहे थे, कूड़ा उठा रहे थे और लोगों को समझा रहे थे कि “स्वच्छता ही सेवा है”।

डेरा सच्चा सौदा और अन्य संस्थाओं से प्रेरित मेरा स्वच्छता अभियान!

मैंने डेरा सच्चा सौदा के संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसां द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छता अभियान के वीडियो देखे जिसमें वह ख़ुद भी सफाई अभियान में हिस्सा लेते हुए दिखे । लाखों लोग, एक साथ झाड़ू उठाकर पूरे शहर की तस्वीर बदल देते थे। साथ ही, आर्ट ऑफ लिविंग, रोटरी क्लब और अन्य संगठनों के सफाई मिशन भी पूरे जोरों-शोरों पर चल रहे थे।

“शरीर और मन की तरह वातावरण की सफाई भी आवश्यक है।”

स्वच्छता अभियान से बदली सोच और जीवनशैली

पहले लोग सोचते थे कि सफाई करना सिर्फ सफाईकर्मियों का काम है। पर अब हर घर के सामने डस्टबिन रखे हैं, लोग खुद कचरा अलग-अलग करते हैं — गीला और सूखा। पहले, सभी कचरा इकट्ठा करने वाले को, “कचरे वाला” बोलते थे लेकिन अब सभी उन्हें सफाई कर्मचारी या सफाई वाले-इन नामों से पुकारते हैं।

महिलाएँ हर रविवार को सफाई मिशन में भाग लेती हैं। बच्चे स्कूल में “स्वच्छता ही सेवा” गाते हैं।

गांव में अब मच्छर कम हो गए हैं, बीमारी घट गई हैं और लोगों का मन भी खुश रहता है।

यह हमें सिखाता है कि जब हम अपने आस-पास को साफ रखते हैं, तो अपने भीतर भी एक पवित्रता महसूस होती है। जब आस-पास साफ़-सुथरा होता है, तो तन-मन भी शांत और स्वच्छ रहता है।

स्वच्छता आंदोलन में नई पीढ़ी की सोच!

आज की युवा पीढ़ी इस सफाई अभियान को केवल सेवा नहीं, बल्कि गर्व की बात समझती है।

कई बच्चे सोशल मीडिया पर “#SwachhGaon” “#Cleanlinesscampaign”  “#DirtFreeIndia” नाम से पेज चलाते हैं, जहाँ वे गांव एवं शहरों की साफ-सुथरी तस्वीरें डालते हैं।

स्कूलों में अब हफ़्ते में एक दिन  “सफाई दिवस” मनाया जाता है।

स्कूलों में “स्वच्छता ” नाम का नाटक भी लिखा और प्रस्तुत किया जाता है !

डेरा सच्चा सौदा और अन्य संगठनों से मिले अनमोल सबक!

डेरा सच्चा सौदा के स्वच्छता अभियानों ने हमें सिखाया कि कोई काम छोटा नहीं होता।

रोटरी क्लब ने दिखाया कि जब समाजसेवी मिलकर काम करें, तो असंभव भी संभव हो जाता है।

आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रमों से हमने सीखा कि मन की शांति और बाहरी स्वच्छता एक-दूसरे से जुड़ी हुई है

स्वच्छता अभियान – कहानी का सार

नालियाँ साफ हैं, रास्तों पर कचरा नहीं, हर गली में पौधे लगे हैं, बच्चे अब खुले में नहीं, बल्कि साफ शौचालयों में जाते हैं।

लोगों के चेहरों पर गर्व झलकता है।

मैं जब अपने आंगन में बैठता हूँ, तो मन में सिर्फ एक ही बात आती है —

“अगर हर कोई अपने आस-पास सफाई रखे, तो पूरा देश चमक उठे”

 Conclusion

इस कहानी से यही सीख मिलती है कि स्वच्छता अभियान सिर्फ सरकारी योजना नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

जब समाज, गुरु, और संस्थाएँ मिलकर काम करते हैं, तो कोई भी लक्ष्य कठिन नहीं रहता।

गांव की सफाई, सिर्फ झाड़ू लगाने का काम नहीं — यह दिलों को जोड़ने और सोच को बदलने की प्रक्रिया है।

सोचने योग्य सवाल

1. क्या आपने कभी अपने गांव या मोहल्ले में स्वच्छता अभियान चलाने की कोशिश की है?

2. क्या आप मानते हैं कि सफाई केवल सफाईकर्मी का काम है या हमारी भी जिम्मेदारी है?

3. अगर हर व्यक्ति रोज़ 10 मिनट अपने आस-पास की सफाई करे, तो क्या हमारा देश बदल नहीं जाएगा?

4. क्या आप अपने बच्चों को “स्वच्छता ही सेवा” का महत्व सिखाते हैं?

5. क्या आप सोचते हैं कि डेरा सच्चा सौदा और अन्य संस्थाओं की तरह हम सब मिलकर एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं?

 

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